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पियरिंग

पियरिंग

पीयरिंग दो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों के बीच एक संबंध है जहां  वे एक दूसरे के नेटवर्क प्रीफिक्स को एक्सचेंज करने के लिए सहमत होते हैं और इस प्रकार ट्रेफिक के फ्लो की अनुमति देते हैं। पीयरिंग डेडिकेटेड सर्किटों अथवा एक शेयरर्ड पीयरिंग फैब्रिक (विशेष रूप से एक न्यूट्रल कोलोकेशन सुविधा वाले अथवा इंटरनेट एक्सचेंज स्थल पर स्थित) के माध्यम से हो सकती है। चुना गया तरीका कई कारकों पर नर्भर हो सकता है, जिसमें एक्सचेंज होने वाले ट्रैफिक की मात्रा, कोई विशेष अपेक्षित सेवाएं आदि भी शामिल है।

ई.आर.नेट केवल पीयरिंग के भले के लिए ही इच्छक नहीं है बल्कि यह अरेंजमेंट में कुछ महत्व देखता है। यह महत्व पार्टियों के बीच अप्रकटता को कम करते हुए बेहतर कार्यनिष्पादन का हो सकता है या यह एडवांस सर्विसेज, जैसे स्ट्रीमिंग कंटेंट डिलीवर करने के लिए मल्टीकास्ट का उपयोग जैसी सुविधाओं का हो सकता है। किसी भी पीयरिंग में ई.आर.नेट की लागत को ध्यान में लेना चाहिए, यथा को-लोकेशन लागत, अतिरिक्त रउटर, इंटरफेस, सर्किट आदि और जहां लाभ की मात्रा कम हो ई.आर.नेट को पीयरिंग का काम नहीं करना चाहिए किंतु यातायात के माध्यम के रूप में उसे ट्रांजिट रिलेशनशिप जारी रखने चाहिए।

पीयरिंग लोकेशन

ई.आर.नेट विभिन्न नेटवर्कों के साथ पीयरिंग का कार्य करता है जिनका उल्लेख नीचे किया गया है:

  • ई.आर.नेट उभरते इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों जैसे रिलायंस, टाटा कम्यूनिकेशंस एवं भारती के साथ पीयरिंग का कार्य करता है ताकि ई.आर.नेट उपयोगकर्ताओं को कॉमर्शियल इंटरनेट उपलब्ध कराया जा सके। ये पीयरिंग कार्य गोरखपुर स्थित प्वाइंट ऑफ प्रेजेन्स के अलावा प्रत्येक ई.आर.नेट प्वाइंट ऑफ प्रेजेन्स से किया जा रहा है।
  • ई.आर.नेट इंडिया मुंबई में नेशनल नॉलेज नेटवर्क (NKN) के साथ पीयरिंग कार्य करता है ताकि ई.आर.नेट उपयोगकर्ताओं को ग्लोबल रिसर्च नेटवर्क उपलब्ध कराया जा सके। यह कार्य ई.आर.नेट और नेशनल नॉलेज नेटवर्क के बीच 10 जी लिंक के माध्यम से किया जाता है।
  • देश के भीतर आंतरिक रूप से डॉमेस्टिक ट्रैफिक को चलाने और कीमती इंटरनेशनल लिंकों को बचाने के लिए ई.आर.नेट नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया के साथ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता एंव चैन्ने में पीयरिंग का कार्य करता है।