ग्रामीण विद्यालयों के लिए आईसीटी सेंटर

राजस्थान के अजमेर और जयपुर स्थित ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 247 विद्यालयों में इस उद्देश्य के साथ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) केंद्र स्थापित किए जाएंगे कि भविष्य में विद्यालयों में अधुनातन आईसीटी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान किया जाए। आईसीटी केंद्रों का कार्य क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र के सभी हिस्सों को बेहतर टेलीकॉम तथा इंटरनेट सेवाओं से शेष देश से आपस में जोड़ते हुए दूरियों को समाप्त किया जाए। आईसीटी केंद्र प्रौद्योगिकी और ई-लर्निंग जैसी एपलीकेशनों का उपयोग करने वाले विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता में वृद्धि करेगा।

  • आईसीटी-इन्फ्रास्ट्रक्चर से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी शेष विश्व से शेष विश्व से जुड़ जाएंगे जिससे कंप्यूटर शिक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी की जानकारी की सुविधा मिलेगी।
  • इन विद्यालयों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी से विद्यार्थियों को लाभ होगा कि वे विभिन्न प्रकार की सेवाओं सहित शाक्षणिक के साथ-साथ सामुदायिक वेबसाइटों तथा शेष विश्व से भी कनेक्ट हो सकेंगे।

राजस्थान राज्य की सरकार द्वारा हाई स्कूल/सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा।

इस परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय में 05 डेस्कटॉप पी.सी. के साथ-साथ प्रिंटर, स्केनिंग डिवाइस, एलसीडी स्क्रीन, पेन-ड्राइव, वेबकॉम, माइक्रोफोन, यू.पी.एस., ई-लर्निंग, ई-कंटेंट क्रिएशन एवं शेयरिंग सॉफ्टवेयर 10 कुर्सियों सहित कंप्यूटर फर्नीचर, कंप्यूटर लैब के लिए मार्बल के फर्श के साथ  स्थान का निर्माण, बिजली के केबलिंग, इंटरनेट/लोकल एरिया नेटवर्क केबलिंग तथा डी.जी.सेटों की व्यवस्था की जाएगी। यह भी प्रस्ताव है कि कुछ विद्यालयों में शारीरिक रूप से विकलांग, नेत्रहीन, मूक एवं बधिर विद्यार्थियों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि इन विद्यालयों में इंटीग्रेटिड एजुकेशन की सुविधा दी जा सके।

दिए गए कंटेंट

  • विद्यार्थी विभिन्न लेक्चरों के ई-कंटेंट और वेबकास्ट की एक्सेस में सफल हो सकेंगे, वे अध्यापकों और अन्य विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर सकेंगे और ज्ञान को साझा करने तथा समस्ताओं के हल के लिए स्वयं को सक्षम बना सकेंगे।
  • आईसीटी के माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा से विद्यार्थी अपने अंदर की खूबियों को उजागर कर सकेंगे और अध्यापन के उच्च कड़े बंधनों, तरीकों और अलग प्रकार की पढ़ाई से मुक्त हो सकेंगे, जिसका वे अभी तक अनुभव कर रहे थे।
  • यह भी प्रस्ताव है कि राजस्थान शिक्षा बोर्ड की पुस्तकों के विवरण और पाठ्यक्रम को डिजिटल पुस्तक के रूप में अपलोड कर दिया जाए, जिसे राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा सकता है।
  • अध्यापकों/विद्यार्थियों के लिए एक सॉफ्टवेयर सुविधा उपलब्ध होगी जिससे वे अपने लेक्चर/प्रस्तुतिकरण स्वयं विकसित कर सकें और उन्हें आपस में साझा कर सकें।
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